छत्तीसगढ़राज्य

नक्सल प्रभावित सुकमा के 50 ग्रामीण पहली बार ट्रेन से पहुंचे गुजरात, प्रधानमंत्री की मौजूदगी में राष्ट्रीय एकता परेड के बने साक्षी

रायपुर: बस्तर के जंगलों से निकलकर गुजरात के एकता नगर तक पहुंची यह यात्रा केवल 50 ग्रामीणों का सफर नहीं थी, बल्कि बदलते सुकमा की एक ऐसी तस्वीर थी, जिसमें पहली बार ट्रेन में बैठने का उत्साह भी था और देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय आयोजनों में से एक का हिस्सा बनने का गौरव भी। कभी नक्सल चुनौती के कारण चर्चा में रहने वाले सुकमा के ग्रामीणों ने गुजरात के केवड़िया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह और भव्य परेड को अपनी आंखों से देखा। जब परेड में छत्तीसगढ़ पुलिस के DRG और STF के जवानों ने कदमताल की, तो सुकमा से पहुंचे ग्रामीणों ने तालियों की गूंज के साथ उनका उत्साह बढ़ाया।
सुकमा जिले के अलग-अलग गांवों से आए 50 नागरिकों के इस दल के लिए गुजरात की यात्रा कई मायनों में खास रही। इनमें बड़ी संख्या ऐसे ग्रामीणों की थी, जिन्होंने अपने जीवन में पहली बार ट्रेन से सफर किया। गांवों की परिचित सीमाओं से बाहर निकलकर लंबी रेल यात्रा करना, नए प्रदेश को देखना और राष्ट्रीय स्तर के भव्य समारोह में शामिल होना उनके लिए एक नया अनुभव था। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के सानिध्य में आयोजित राष्ट्रीय एकता परेड ने इस यात्रा को यादगार बना दिया।

नक्सल प्रभावित सुकमा के 50 ग्रामीण पहली बार ट्रेन से पहुंचे गुजरात, प्रधानमंत्री की मौजूदगी में राष्ट्रीय एकता परेड के बने साक्षी

 

एकता नगर में आयोजित समारोह के दौरान ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़ पुलिस के उन जवानों को परेड में हिस्सा लेते देखा, जो बस्तर के चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में सुरक्षा और शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाते हैं। DRG और STF के जवानों की अनुशासित कदमताल ने ग्रामीणों को गौरवान्वित किया। अपने ही प्रदेश के जवानों को राष्ट्रीय मंच पर प्रतिनिधित्व करते देख उन्होंने तालियां बजाकर उनका मनोबल बढ़ाया। यह उनके लिए केवल परेड देखना नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र के जवानों के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने का अनुभव भी था।

नक्सल प्रभावित सुकमा के 50 ग्रामीण पहली बार ट्रेन से पहुंचे गुजरात, प्रधानमंत्री की मौजूदगी में राष्ट्रीय एकता परेड के बने साक्षी

 

इस विशेष यात्रा का आयोजन पुलिस अधीक्षक सुकमा मयंक गुर्जर (भापुसे) के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनोज तिर्की के मार्गदर्शन में किया गया। उप पुलिस अधीक्षक सपन चौधरी के नेतृत्व में 50 सदस्यीय दल गुजरात पहुंचा। यात्रा के दौरान ग्रामीणों को राष्ट्रीय एकता समारोह में भाग लेने के साथ स्टैच्यू ऑफ यूनिटी देखने और गुजरात की संस्कृति तथा परिवेश से परिचित होने का अवसर मिला।

नक्सल प्रभावित सुकमा के 50 ग्रामीण पहली बार ट्रेन से पहुंचे गुजरात, प्रधानमंत्री की मौजूदगी में राष्ट्रीय एकता परेड के बने साक्षी

 

गुजरात प्रवास के बाद सुकमा लौटे सभी 50 नागरिकों का पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर ने अपने कार्यालय में आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने प्रत्येक सदस्य को पुष्पगुच्छ भेंट कर अभिनंदन किया और उनसे यात्रा के अनुभव सुने। ग्रामीणों ने बताया कि पहली बार ट्रेन में बैठने से लेकर प्रधानमंत्री की उपस्थिति में आयोजित राष्ट्रीय समारोह देखने तक, यह पूरी यात्रा उनके जीवन की अविस्मरणीय स्मृति बन गई है।
दल के सदस्यों ने इस अवसर के लिए सुकमा पुलिस और छत्तीसगढ़ शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उनके लिए यह यात्रा केवल गुजरात भ्रमण नहीं, बल्कि अपने गांव से निकलकर देश की विविधता, एकता और राष्ट्रीय गौरव को करीब से देखने का अवसर बन गई।

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