छत्तीसगढ़राज्य

राज्योत्सव में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रदर्शनी को मिला द्वितीय पुरस्कार, ग्रामीण विकास के नवाचारों ने बटोरी सराहना

रायपुर: छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रदर्शनी ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और नवाचारों का आकर्षक संगम बनकर उभरी। विभाग की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से गांवों में आ रहे बदलाव और ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने वाली इस प्रदर्शनी को राज्योत्सव में द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। प्रदर्शनी में जहां बिहान की दीदियों के हुनर से तैयार ‘छत्तीसकला’ ब्रांड के उत्पादों ने आगंतुकों का ध्यान आकर्षित किया, वहीं धमतरी जिले की पीएम जनमन आवास कॉलोनी के जीवंत मॉडल और अपशिष्ट प्लास्टिक से सड़क निर्माण जैसे नवाचारों ने ग्रामीण विकास की नई संभावनाओं से परिचित कराया।

‘छत्तीसकला’ में दिखा बिहान की दीदियों का हुनर, स्व-सहायता समूहों के उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय बना आकर्षण

 

प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ की अभिनव पहल ‘छत्तीसकला’ विशेष आकर्षण का केंद्र रही। स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा निर्मित स्थानीय एवं पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक ब्रांडिंग और आकर्षक पैकेजिंग के साथ प्रस्तुत किया गया। जेराफूल चावल, मिलेट आधारित खाद्य पदार्थ, तिखुर पाउडर, सत्तू लड्डू सहित विभिन्न खाद्य उत्पादों, हस्तशिल्प और सजावटी सामग्रियों का प्रदर्शन एवं विक्रय किया गया।
इसकी विशेषता यह रही कि बिहान की दीदियों ने स्वयं स्टॉल का संचालन करते हुए आगंतुकों को अपने उत्पादों और उद्यमिता से जुड़ी जानकारी दी। छत्तीसकला के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के कौशल, परिश्रम और उद्यमशीलता को बाजार से जोड़ने की पहल ने महिला सशक्तिकरण की प्रभावशाली तस्वीर प्रस्तुत की।

‘छत्तीसकला’ में दिखा बिहान की दीदियों का हुनर, स्व-सहायता समूहों के उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय बना आकर्षण

प्रदर्शनी में धमतरी जिले के मसान डबरा में विकसित पीएम जनमन आवास कॉलोनी का मॉडल भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। कॉलोनी के सुव्यवस्थित आवासों, स्वच्छ एवं हरित परिसर, बेहतर बुनियादी सुविधाओं तथा सामुदायिक विकास की अवधारणा को आकर्षक मॉडल और वास्तविक तस्वीरों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। इस मॉडल ने दिखाया कि प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के माध्यम से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों को पक्के आवास के साथ बेहतर जीवन की बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के द्वारा ग्रामीण सड़क निर्माण में अपशिष्ट प्लास्टिक के उपयोग का नवाचार प्रदर्शनी की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल रहा। विभाग द्वारा प्रस्तुत जानकारी के अनुसार राज्य के चार जिलों में कुल 7,900 किलोग्राम अर्थात 7.9 टन अपशिष्ट प्लास्टिक का उपयोग कर 12 किमी सड़कों का निर्माण किया गया है। बस्तर जिले में 400 किलोग्राम अपशिष्ट प्लास्टिक से 1.5 किलोमीटर, महासमुंद में 3,700 किलोग्राम से 5 किलोमीटर, सरगुजा में 550 किलोग्राम से 1.5 किलोमीटर तथा मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में 3,250 किलोग्राम अपशिष्ट प्लास्टिक का उपयोग कर 4 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया गया। इस अभिनव प्रयोग के माध्यम से प्लास्टिक कचरे का उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल कर पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अधोसंरचना विकास का प्रभावशाली उदाहरण प्रस्तुत किया गया।

‘छत्तीसकला’ में दिखा बिहान की दीदियों का हुनर, स्व-सहायता समूहों के उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय बना आकर्षण

बिहान के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘दीदी के गोठ’ के अब तक प्रसारित सभी 15 एपिसोड का भी प्रदर्शनी में प्रदर्शन किया गया। इसकी खास बात यह रही कि जिन ग्रामीण महिलाओं की सफलता की कहानियां इस कार्यक्रम के माध्यम से लोगों तक पहुंच रही हैं, उन दीदियों ने स्वयं भी प्रदर्शनी में पहुंचने वाले आगंतुकों से संवाद किया। दीदियों ने अपने संघर्ष, स्वरोजगार, आजीविका गतिविधियों और आर्थिक आत्मनिर्भरता की यात्रा साझा की। इस प्रकार ‘दीदियों की कहानी, उन्हीं की जुबानी’ की अवधारणा राज्योत्सव में साकार होती दिखाई दी।
प्रदर्शनी में विकसित भारत रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) अर्थात वीबी-जी राम जी के अंतर्गत ग्रामीण विकास से जुड़ी गतिविधियों को आकर्षक मॉडलों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। इसमें जल सुरक्षा एवं संरक्षण, मूल ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका संवर्धन अवसंरचना तथा आपदा प्रबंधन सहित कुल 375 अनुमेय कार्यों की जानकारी प्रदर्शित की गई। जल संरक्षण के लिए डिफंक्ट बोरवेल रिचार्ज पिट, ‘मेरी बेटी मेरा अभिमान’ के अंतर्गत बालिका शौचालय, आजीविका संवर्धन के लिए बकरी पालन तथा वन सुरक्षा एवं संरक्षण के मॉडल प्रदर्शनी में शामिल रहे। इन मॉडलों के जरिए भूजल पुनर्भरण, ग्रामीण बालिकाओं की स्वच्छता एवं गरिमा, आजीविका के अवसरों और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।
प्रदर्शनी में द्वीप्ती योजना और प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से जुड़ी ‘सोलर दीदी’ पहल के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को सौर ऊर्जा आधारित उद्यमिता से जोड़ने के प्रयासों को भी प्रस्तुत किया गया। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में बिहान की दीदियों की भागीदारी और उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता की संभावनाओं को तस्वीरों एवं जानकारियों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया।
राज्योत्सव में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रदर्शनी ने यह संदेश दिया कि छत्तीसगढ़ के गांव अब केवल विकास योजनाओं के लाभार्थी नहीं, बल्कि नवाचार, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता के नए केंद्र बन रहे हैं। इसी प्रयास के लिए उसे विभागीय प्रदर्शनी में विभाग को द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ।
एक ओर पीएम जनमन आवास कॉलोनी जनजातीय परिवारों के बेहतर जीवन की तस्वीर प्रस्तुत कर रही थी, तो दूसरी ओर छत्तीसकला के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के उत्पाद बाजार तक पहुंच रहे थे। अपशिष्ट प्लास्टिक से सड़क निर्माण, जल संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा जैसे नवाचारों ने पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार विकास की दिशा को रेखांकित किया।

 

 

 

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