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57वीं जीएसटी परिषद के ऐतिहासिक फैसलों से व्यापारियों को बड़ी राहत, कर प्रणाली में प्रक्रियागत सरलीकरण का नया अध्याय : वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी

रायपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की कर व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और व्यापार अनुकूल बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आयोजित 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में व्यापारियों, उद्यमियों और उद्योग जगत को बड़ी राहत देने वाले अनेक महत्वपूर्ण प्रक्रियागत सुधारों की सिफारिश की गई है। बैठक में शामिल छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने इन निर्णयों को व्यापार सुगमता, कर प्रशासन में पारदर्शिता और उद्यमिता को प्रोत्साहन देने की दिशा में युगांतकारी सुधार बताया है।

वित्त मंत्री चौधरी ने बैठक के उपरांत कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले वर्ष जीएसटी 2.0 के माध्यम से कर की दरों में व्यापक सुधार कर देश की जनता और व्यापार जगत को बड़ी राहत दी गई थी। अब 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में प्रक्रियागत सुधारों (Procedural Reforms) और प्रक्रियाओं के सरलीकरण (Procedural Simplification) पर विशेष जोर दिया गया है। इन सुधारों का उद्देश्य व्यापारियों पर अनावश्यक अनुपालन बोझ कम करना, कर प्रशासन को अधिक जवाबदेह बनाना और कारोबार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है।

वित्त मंत्री चौधरी ने बताया कि जीएसटी परिषद ने कर कानून से गिरफ्तारी की शक्ति से संबंधित धारा 69 को हटाने की महत्वपूर्ण सिफारिश की है। इसके साथ ही मुकदमा चलाने के लिए कर राशि की सीमा वर्तमान एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है। सामान्य जुर्माने की राशि भी 25 हजार रुपये से घटाकर अधिकतम 10 हजार रुपये करने की सिफारिश की गई है।
उन्होंने कहा कि इन बदलावों का उद्देश्य सामान्य प्रक्रियागत त्रुटियों और छोटे मामलों में व्यापारियों को अनावश्यक कानूनी परेशानियों से राहत देना है। हालांकि जानबूझकर कर चोरी और धोखाधड़ी करने वालों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी। इससे ईमानदारी से व्यापार करने वाले करदाताओं का विश्वास बढ़ेगा और कर प्रशासन अधिक संतुलित एवं व्यावहारिक बनेगा।
वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि ई-वे बिल की जांच से संबंधित प्रक्रियाओं में भी महत्वपूर्ण सुधार प्रस्तावित किए गए हैं। नए प्रावधानों के अनुसार किसी मालवाहक वाहन को जांच के लिए रोकने से पहले ठोस सूचना होना आवश्यक होगा। इसके लिए संयुक्त आयुक्त अथवा उससे उच्च स्तर के अधिकारी की अनुमति भी अनिवार्य होगी।
उन्होंने बताया कि ई-वे बिल की जांच संबंधित राज्य में ही की जा सकेगी, जहां माल भेजने वाला अथवा प्राप्त करने वाला स्थित हो। केवल रास्ते में पड़ने वाले राज्यों में मालवाहक वाहनों को जांच के नाम पर नहीं रोका जाएगा।
चौधरी ने कहा कि इन सुधारों से परिवहन के दौरान होने वाली अनावश्यक देरी कम होगी। माल की आवाजाही तेज होने के साथ लॉजिस्टिक्स लागत घटाने, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने और व्यापारिक गतिविधियों को सुगम बनाने में मदद मिलेगी। इसका लाभ छत्तीसगढ़ सहित देशभर के व्यापारियों, परिवहन व्यवसायियों और औद्योगिक इकाइयों को मिलेगा।

कर प्रणाली में प्रक्रियागत सरलीकरण का नया अध्याय : वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी

वित्त मंत्री चौधरी ने बताया कि जीएसटी रिफंड प्रणाली को अधिक तेज, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुधारों की सिफारिश की गई है। इसके अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में जमा अतिरिक्त राशि का पूरा रिफंड सिस्टम द्वारा स्वतः स्वीकृत किया जा सकेगा। इसके लिए किसी अधिकारी की अलग से मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
उन्होंने बताया कि निर्यात और उलटे शुल्क ढांचे (Inverted Duty Structure) से संबंधित मामलों में रिफंड दावे की 90 प्रतिशत राशि तत्काल मंजूर करने का प्रावधान प्रस्तावित है। साथ ही रिफंड आवेदन की जांच की समय-सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने की सिफारिश की गई है।
चौधरी ने कहा कि रिफंड प्रक्रिया में तेजी आने से व्यापारियों और उद्यमियों की कार्यशील पूंजी लंबे समय तक अटकी नहीं रहेगी। समय पर राशि उपलब्ध होने से व्यवसाय संचालन, उत्पादन और नए निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। विशेष रूप से निर्यातकों और छोटे एवं मध्यम उद्योगों को इससे बड़ी सुविधा मिलेगी।

वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि जीएसटी पंजीयन और उसमें संशोधन की प्रक्रियाओं को भी सरल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के अंतर्गत मुख्य व्यवसाय स्थल को छोड़कर पंजीयन संबंधी अन्य जानकारियों में संशोधन पोर्टल के माध्यम से स्वतः किया जा सकेगा। इसी प्रकार पंजीयन निरस्त कराने की प्रक्रिया भी अधिक सरल और स्वचालित होगी।
उन्होंने बताया कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से वस्तुओं की बिक्री करने वाले छोटे व्यापारियों को भी राहत देने की सिफारिश की गई है। ऐसे विक्रेताओं को प्रत्येक राज्य में अलग कार्यालय स्थापित करने की अनिवार्यता से राहत मिलेगी।
चौधरी ने कहा कि डिजिटल व्यापार और ई-कॉमर्स के तेजी से बढ़ते अवसरों को देखते हुए यह सुधार अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे छोटे व्यापारियों, स्टार्टअप और नए उद्यमियों को कम लागत में अपने उत्पादों को देशभर के बाजारों तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी।

वित्त मंत्री चौधरी ने बताया कि जीएसटी परिषद ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की सुविधा का दायरा बढ़ाने संबंधी महत्वपूर्ण सिफारिशें भी की हैं। प्रस्तावित प्रावधानों के अंतर्गत आउटडोर कैटरिंग, स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा, टेलीकॉम टावर तथा फैक्ट्री परिसर के बाहर स्थापित पाइपलाइन पर भी पात्रता के अनुसार इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
उन्होंने कहा कि इनपुट टैक्स क्रेडिट का विस्तार होने से कर पर कर लगने की समस्या कम होगी तथा उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की लागत घटाने में सहायता मिलेगी। इससे औद्योगिक निवेश, उत्पादन क्षमता और उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा।

वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि जीएसटी परिषद की सिफारिशों में छोटे व्यापारियों और सामान्य करदाताओं को अनावश्यक कानूनी एवं आर्थिक बोझ से राहत देने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार 10 हजार रुपये से कम कर राशि वाले मामलों में नोटिस जारी नहीं किया जाएगा। इसी प्रकार धोखाधड़ी से संबंधित नहीं होने वाले मामलों में निर्धारित समय के भीतर कर और ब्याज जमा करने पर केवल पांच प्रतिशत जुर्माना लगाने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
उन्होंने बताया कि पांच करोड़ रुपये तक वार्षिक टर्नओवर वाले छोटे व्यापारियों को रिटर्न दाखिल करने में देरी होने पर भी राहत मिलेगी। यदि ऐसे व्यापारी संबंधित महीने के अंत तक अपना रिटर्न दाखिल कर देते हैं, तो उन्हें विलंब शुल्क से छूट देने की सिफारिश की गई है।
चौधरी ने कहा कि छोटे व्यापारियों के लिए ये सुधार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इससे सामान्य प्रक्रियागत चूक के कारण होने वाली परेशानियां कम होंगी और व्यापारियों को अपने कारोबार के विस्तार पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा।

वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि जीएसटी परिषद द्वारा प्रस्तावित इन प्रक्रियागत सुधारों को आवश्यक कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद 1 अप्रैल 2027 से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने कहा कि जीएसटी 2.0 के माध्यम से कर दरों में राहत देने के बाद अब कर अनुपालन, पंजीयन, रिफंड, ई-वे बिल जांच और दंडात्मक प्रावधानों में व्यापक सरलीकरण की दिशा में कदम उठाए गए हैं। इससे व्यापार जगत में विश्वास बढ़ेगा और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि इन सुधारों का सकारात्मक प्रभाव छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। राज्य में व्यापार, उद्योग, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को सरल जीएसटी प्रक्रियाओं का लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार भी निवेश, उद्योग और व्यापार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। केंद्र सरकार के कर सुधारों और राज्य सरकार के व्यापार सुगमता संबंधी प्रयासों से प्रदेश में औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार के नए अवसरों को प्रोत्साहन मिलेगा।

वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आर्थिक सुधारों के एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। सरकार का उद्देश्य केवल कर संग्रहण बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसी सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद कर प्रणाली विकसित करना है, जो व्यापारियों को सुविधा दे, उद्यमिता को प्रोत्साहित करे और देश की आर्थिक प्रगति को गति प्रदान करे।
उन्होंने कहा कि 57वीं जीएसटी परिषद की सिफारिशें इसी व्यापक दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करती हैं। गिरफ्तारी संबंधी प्रावधानों में बदलाव, ई-वे बिल जांच में सुधार, स्वचालित रिफंड, सरल पंजीयन, इनपुट टैक्स क्रेडिट का विस्तार और छोटे व्यापारियों को दंडात्मक प्रावधानों में राहत जैसे कदम व्यापार सुगमता की दिशा में दूरगामी साबित होंगे।
चौधरी ने कहा कि इन सुधारों से देश में निवेश और उद्यमिता को नई ऊर्जा मिलेगी तथा वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को और अधिक मजबूती प्राप्त होगी।
वित्त मंत्री चौधरी ने इन महत्वपूर्ण सुधारों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के प्रति आभार व्यक्त किया।

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