छत्तीसगढ़राज्य

राज्योत्सव परिसर में कृषि विभाग की प्रदर्शनी में किसानों को मिल रही खेती से जुड़ी जानकारियां

रायपुर, 03 नवम्बर 2026 नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्सव परिसर में कृषि विभाग द्वारा लगाए गए स्टॉल पर किसानों को आधुनिक खेती, पारंपरिक बीजों के संरक्षण और फसल विविधीकरण की जानकारी दी जा रही है। धान का कटोरा कहे जाने वाले प्रदेश में कृषि विरासत को सहेजने के साथ उन्नत धान प्रजातियों, दलहन-तिलहन, मोटे अनाज और फल-उद्यानिकी को बढ़ावा देकर किसानों की आर्थिक समृद्धि के नए रास्ते खोले जा रहे हैं। शासन की किसान हितैषी योजनाएं उनके जीवन में खुशहाली ला रही हैं

स्टॉल पर राज्य के विभिन्न जिलों की माटी और जलवायु के अनुकूल पारंपरिक सुगंधित धान किस्मों का प्रदर्शन किया गया है। इनमें कोरिया का कमल, सूरजपुर का श्याम जीरा, बलरामपुर का ठाकुर भोग, सरगुजा का विष्णु भोग, जशपुर का शीतल भोग, बिलासपुर का समुंद चीनी, कोरबा का जटा शंकर, रायगढ़ का जौ फूल, कबीरधाम का गंगा प्रसाद, मुंगेली का सुकला फूल, जांजगीर-चांपा का चिन्नौर, बेमेतरा की छत्री, बलौदाबाजार-भाटापारा का मुनि भोग, राजनांदगांव का कपूर सार, दुर्ग का कालिका मोद, रायपुर व बालोद का दुबराज, महासमुंद का कुबरी मोहर, धमतरी की तुलसी मंजरी, गरियाबंद की इलायची, कांकेर का बादशाह भोग, नारायणपुर का अमृत भोग, कोंडागांव का राजा भोग, बीजापुर का कदम फूल, दंतेवाड़ा का आत्मा शीतल, बस्तर का लोकती मच्छी और सुकमा का गंगा बारू शामिल हैं।

एक ही जगह पर 20 से अधिक धान की किस्में, दलहन-तिलहन और उद्यानिकी फसलों की विभिन्न किस्मों का प्रदर्शन

 

इसके अलावा औषधीय गुणों से भरपूर और उच्च गुणवत्ता वाली 20 से अधिक धान की प्रजातियां भी रखी गई हैं। इनमें विक्रम टीसीआर, छत्तीसगढ़ धान-1919, मधुराज, महामाया, तरुण भोग, छत्तीसगढ़ देवभोग, बादशाह भोग सलेक्शन-1, छत्तीसगढ़ सुगंधित भोग, छत्तीसगढ़ भाव्या, छत्तीसगढ़ जिंक राईस-1 (सी.जी. जिंक राइस एमएस), गठूवान, महाराजी, विष्णु भोग, दुबराज सलेक्शन-1, रेड राइस, ब्लैक राईस, प्रोटीन युक्त प्रोटेजिन, इंदिरा एरोबिक-1, बस्तर धान-1, स्वर्णा सब-1, सांभा सब-1, आई.आर.-64, पीकेवी एचएमटी तथा एमटीयू-3626, एमटीयू-1318, एमटीयू-1075, एमटीयू-1239 और एमटीयू-1223 प्रमुख हैं। कृषि विशेषज्ञ किसानों को इन किस्मों की उत्पादकता, पोषण और बाजार मांग के बारे में विस्तार से समझा रहे हैं।

फसल विविधीकरण को गति देने के लिए स्टॉल पर राज्य शासन की कृषक उन्नति योजना के बारे में भी बताया जा रहा है। इस योजना के तहत खरीफ मौसम में धान के बदले दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो-कुटकी, रागी एवं कपास की फसल लेने वाले किसानों को 15,000 रुपए प्रति एकड़ तथा पहले से इन वैकल्पिक फसलों की खेती कर रहे किसानों को 10,000 रुपए प्रति एकड़ की आदान सहायता राशि सीधे बैंक खाते में दी जा रही है। इससे प्रेरित होकर किसान दलहन और तिलहन की खेती बड़े पैमाने पर अपना रहे हैं। इनके प्रमाणित बीज भी प्रदर्शनी में रखे गए हैं।

 राज्योत्सव परिसर में कृषि विभाग की प्रदर्शनी में किसानों को मिल रही खेती से जुड़ी जानकारियां

 

दलहन संवर्ग में चना एवं तिवड़ा की उन्नत किस्मों जैसे महातिवड़ा, प्रतीक (तिवड़ा/लाथाइरस), छत्तीसगढ़ लोचन चना, छत्तीसगढ़ चना (सी.जी. चना-2), आरवीजी-210, जेजी-24, जीएनजी-2171 और इंदिरा चना-1 की विशेषताओं से किसानों को अवगत कराया जा रहा है। इसी तरह मूंग व उड़द की प्रज्ञा, पैरिमूँग, एमएच-421, टी-9 और इंदिरा उड़द (इंदिरा प्रथम-1), अरहर की सी.जी. अरहर-1 व बीडीएन-711, मसूर की सी.जी. मसूर-1 व आरवीएल-31, मटर की इंदिरा मटर-1, काशी नंदिनी, आर्किल व पीएफडी-11-05 तथा कुल्थी की इंदिरा कुलथी-1 व सी.जी. कुलथी-3 (बिलासा) किस्मों के बीज और खेती की तकनीक बताई जा रही है। रबी की सफल खेती के लिए गेहूं की दो उन्नत किस्में अवंति और कनिष्का भी सुझाई जा रही हैं।

तिलहन फसलों में अलसी की 12 किस्में रखी गई हैं, जिनमें अधिक भूरा, कम भूरा, आर-2607, आर-2717, वाईएल.एस-23, आर-552, आर-17, किरण, आर-2695, आरएलसी-187, कार्तिका व इंदिरा अलसी (आरएलसी-92) शामिल हैं। सरसों की तीन प्रमुख किस्मों आजाद महक, सुरेखा और आरएच-1975 के साथ सी.जी. सरसों व पीपीएस-1 को भी स्थान दिया गया है। इसी तरह कुसुम (सैफ्लावर) की तीन किस्में आईजीकेवी कुसुम, छत्तीसगढ़ कुसुम-1 और छत्तीसगढ़ कुसुम-2, सूरजमुखी की उन्नत संकर प्रजातियां सीओएच-4, सन एच-1 और सीओएच-3, सोयाबीन की सी.जी. सोया-1 व जेएस-20-98, रामतिल की जीए-10 व बीएन-03 तथा तिल की जीटी-10 और टीकेजी-55 किस्में उपलब्ध हैं। लघु धान्य सी.जी. कोदो-2 की तकनीक से भी किसानों को परिचित कराया जा रहा है।

 

 

 

 

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