छत्तीसगढ़राज्य

धान की फसल पर कुदरत का कहर : लोकगीत गाकर किसानों ने बयां किया दर्द, सरकार से मुआवजे की लगाई गुहार

कवर्धा। दीपावली की खुशियों के बीच छत्तीसगढ़ के किसानों के घरों में मातम जैसा माहौल है। जिस धान की फसल को किसान अपनी मेहनत और पसीने से सींचकर तैयार कर रहे थे, उसी फसल पर बेमौसम बारिश और अंधड़ ने कहर बरपा दिया। अर्नब चक्रवात के चलते खेतों में लहलहाती फसल बर्बादी की भेंट चढ़ गई। किसानों के सामने परिवार के भरण-पोषण से लेकर बच्चों की शादी-ब्याह तक की चिंता खड़ी हो गई है। कवर्धा में किसानों ने अपनी पीड़ा बयां करने के लिए छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति का सहारा लिया। तबला, ढोलक और हारमोनियम की धुन पर गीत गाकर किसानों ने सरकार से मुआवजे की गुहार लगाई है।
किसान सालभर खेतों में दिन-रात मेहनत करता है, इस उम्मीद में कि फसल बिकेगी तो घर में खुशहाली आएगी। बच्चों की पढ़ाई, बेटे-बेटियों की शादी और परिवार की जरूरतें पूरी होंगी, लेकिन कुदरत की मार ने किसानों के सपनों पर पानी फेर दिया। खेतों में खड़ी धान और सरसों की फसल को नुकसान पहुंचने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।

प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग
अपनी व्यथा शासन-प्रशासन तक पहुंचाने के लिए किसानों ने अनोखा तरीका अपनाया। लोकगीतों के जरिए तबला, ढोलक और हारमोनियम की संगत में अपनी पीड़ा सुनाई। किसानों की मांग है कि फसलों को हुए नुकसान का तत्काल सर्वे कराया जाए और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए।

किसानों को सरकार से उम्मीद
दीपावली के त्योहार से पहले फसल बर्बाद होने से किसानों की खुशियां भी संकट में हैं। जिन घरों में दीप जलने थे, वहां अब नुकसान की चिंता सता रही है। किसानों को उम्मीद है कि सरकार उनकी पुकार सुनेगी और उन्हें राहत देकर इस मुश्किल घड़ी में सहारा देगी।

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