छत्तीसगढ़राज्य

महासमुंद में आयुष सेवाओं का विस्तार, पांच साल में 8.4 लाख से ज्यादा लोगों को मिला लाभ

रायपुर: महासमुंद जिले में आयुष चिकित्सा सेवाओं के विस्तार से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को अब अपने घर के नजदीक ही आयुर्वेद, होम्योपैथी और योग आधारित स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल रहा है। जिला आयुष विभाग की पहल से न केवल उपचार की सुविधा ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंची है, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी लोगों में जागरूकता बढ़ी है।
जिले के 36 आयुष संस्थानों में नियमित ओपीडी संचालित हो रही है। यहां लोगों को स्वास्थ्य परामर्श, जांच, उपचार और निःशुल्क औषधियां उपलब्ध कराई जा रही हैं। आयुष चिकित्सक उपचार के साथ योग, आहार-विहार और स्वस्थ जीवनशैली को लेकर भी परामर्श दे रहे हैं।
आयुष सेवाओं की बढ़ती पहुंच का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि वर्ष 2021-22 में 86,279 लोगों ने सेवाओं का लाभ लिया। इसके बाद 2022-23 में 1,91,854, 2023-24 में 2,02,424, 2024-25 में 1,81,307 और 2025-26 में 1,83,303 लोगों ने आयुष सेवाओं का लाभ उठाया। वहीं अप्रैल से अगस्त 2026 तक 70,146 लोग आयुष सेवाओं से जुड़े। इस तरह पिछले पांच वर्षों और चालू वित्तीय वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में 8 लाख 15 हजार से अधिक लोगों तक आयुष सेवाओं की पहुंच बनी है।
वरिष्ठ नागरिकों की विशेष स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जिले के 36 आयुष संस्थानों में ’सियान जतन क्लिनिक’ संचालित किया जा रहा है। प्रत्येक गुरुवार को 60 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार किया जाता है। क्लिनिक में सामान्य स्वास्थ्य जांच, प्रकृति परीक्षण, आयुर्वेदिक, यूनानी एवं होम्योपैथी औषधियों के साथ पंचकर्म सेवाएं भी उपलब्ध हैं। इस पहल से बुजुर्गों को नियमित स्वास्थ्य देखभाल की सुविधा उनके नजदीक ही मिल रही है।
सियान जतन क्लिनिक से वर्ष 2021-22 में 9,706, 2022-23 में 36,972, 2023-24 में 41,607, 2024-25 में 36,452, 2025-26 में 34,502 तथा अप्रैल से अगस्त 2026 तक 11,761 वरिष्ठ नागरिक लाभान्वित हुए हैं।
आयुष चिकित्सा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए जिले में स्वास्थ्य शिविर और जन-जागरूकता कार्यक्रम भी लगातार आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में आयुर्वेद, योग, यूनानी और होम्योपैथी विशेषज्ञों द्वारा निःशुल्क परामर्श, स्वास्थ्य परीक्षण और औषधि वितरण किया जाता है।
रन फॉर आयुर्वेद’ जैसे आयोजनों के जरिए लोगों को स्वस्थ जीवनशैली के लिए प्रेरित किया गया, जिसमें करीब 500 लोगों ने भागीदारी की। स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों और युवाओं के बीच प्रकृति परीक्षण और स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियों के जरिए आयुष को केवल उपचार नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली और बीमारी से बचाव से जोड़ा जा रहा है।
ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में योग को बढ़ावा देने के लिए जिले के 14 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में नियमित योग गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। यहां नागरिकों को योग, प्राणायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। इसके अलावा जिला मुख्यालय में भी दो स्थानों पर नियमित योग गतिविधियां चल रही हैं। इससे लोगों में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
जिले के आयुष विंग में पंचकर्म चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होने से मरीजों को आयुर्वेद की विशिष्ट चिकित्सा सेवाओं के लिए बाहर जाने की जरूरत कम हुई है। चिकित्सकीय परामर्श के आधार पर पंचकर्म की विभिन्न प्रक्रियाएं संचालित की जा रही हैं। आयुष सेवाओं के विस्तार ने जिले में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रति लोगों का भरोसा मजबूत किया है। गांव के नजदीक ओपीडी, मुफ्त दवाएं, बुजुर्गों के लिए विशेष क्लिनिक, योग और पंचकर्म जैसी सुविधाओं ने आयुष को ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया है।

 

 

 

 

 

 

 

 

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